.पुण्य करने और पाप कर्म से दूर रहने वाला व्यक्ति, इस लोक में और परलोक दोनों ही जगहों में अपने पुण्य कर्मों के अच्छे फलों को पाकर मुदित (देवीय आनंद) की अवस्था में रहता है।

 16. पुण्य करने और पाप कर्म से दूर रहने वाला व्यक्ति, इस लोक में और परलोक दोनों ही जगहों में अपने पुण्य कर्मों के अच्छे फलों को पाकर मुदित (देवीय  आनंद) की अवस्था में रहता है।

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